IMD Monsoon Update: देश के कई हिस्सों में जुलाई के दौरान बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने से उमस और गर्मी बढ़ी है। दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। किसानों के लिए भी बारिश का वितरण महत्वपूर्ण बना हुआ है, क्योंकि लंबे सूखे अंतराल से बुवाई, सिंचाई और मिट्टी की नमी प्रभावित हो सकती है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 15 जुलाई के पूर्वानुमान के अनुसार मॉनसून की गतिविधियों में सभी राज्यों में एक साथ तेजी नहीं आएगी। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर पहले से सक्रिय रहेगा, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में 19 से 21 जुलाई के बीच वर्षा का दायरा बढ़ने की संभावना है।
मुख्य बातें
- दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 17 जुलाई तक गर्म और उमस भरा मौसम रह सकता है।
- हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 15 से 20 जुलाई के बीच कहीं-कहीं बारिश संभव है।
- 21 जुलाई को इन क्षेत्रों में बारिश का फैलाव बढ़ने का पूर्वानुमान है।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 21 जुलाई के बीच अधिक स्थानों पर बारिश हो सकती है।
- बिहार में 17 से 20 जुलाई के दौरान बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
- बंगाल की खाड़ी के आसपास बनने वाले परिसंचरण से पूर्वी और मध्य भारत में नमी बढ़ सकती है।
- पूरे देश में सप्ताह की कुल बारिश सामान्य से थोड़ी कम रह सकती है।
क्या वास्तव में पूरे देश में मॉनसून पर ब्रेक लगा है?
देशभर के मॉनसून को पूरी तरह ठहरा हुआ कहना सही नहीं होगा। बारिश का वितरण इस समय असमान है। उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी हिस्सों और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में गतिविधियां कमजोर रही हैं, जबकि पूर्वी, पूर्वोत्तर और पश्चिमी तट के कई इलाकों में बारिश जारी है।
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IMD ने 15 जुलाई के पूर्वानुमान में पश्चिम बंगाल, झारखंड और सिक्किम में 15 से 21 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश की संभावना जताई है। बिहार में 17 से 20 जुलाई और पूर्वोत्तर राज्यों में भी सप्ताह के अधिकांश दिनों में बारिश होने का अनुमान है।
इसलिए मौजूदा स्थिति को क्षेत्रीय मॉनसून ब्रेक या कमजोर चरण के रूप में समझना अधिक उचित है, न कि पूरे भारत में मॉनसून के रुक जाने के रूप में।
दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में कब होगी बारिश?
दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब में तत्काल व्यापक और लगातार बारिश का पूर्वानुमान नहीं है। IMD के अनुसार हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 15 से 20 जुलाई के बीच कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 21 जुलाई को बारिश का दायरा बढ़ने का अनुमान है।
पंजाब में 15 से 19 जुलाई के दौरान छिटपुट बारिश और 20–21 जुलाई को अधिक स्थानों पर वर्षा हो सकती है। हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में 20 और 21 जुलाई को कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना भी जताई गई है।
15 से 17 जुलाई तक दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के कुछ हिस्सों में गर्म तथा उमस भरा मौसम बने रहने की संभावना है। ऐसे में स्थानीय बारिश नहीं होने पर दिन के साथ रात में भी बेचैनी महसूस हो सकती है।
उत्तर प्रदेश और राजस्थान का मौसम
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 21 जुलाई और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 21 जुलाई के दौरान बारिश का फैलाव बढ़ सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 21 जुलाई के बीच कहीं-कहीं भारी वर्षा का भी अनुमान है।
राजस्थान में 15 से 21 जुलाई के दौरान बारिश पूरी तरह बंद नहीं रहेगी, लेकिन अधिकांश स्थानों पर इसका वितरण छिटपुट रह सकता है। IMD के विस्तारित पूर्वानुमान में 16 से 22 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान राजस्थान में औसत बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना बताई गई है।
बिहार, झारखंड और पूर्वी भारत में बढ़ेगी गतिविधि
पूर्वी भारत में मॉनसून अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है। बिहार में 17 से 20 जुलाई के दौरान व्यापक बारिश तथा 18 से 20 जुलाई तक कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है।
झारखंड में 15 से 21 जुलाई के दौरान अधिकांश इलाकों में बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी कई दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश के दौर आ सकते हैं।
इन क्षेत्रों में बिजली गिरने, जलभराव और निचले इलाकों में पानी जमा होने का स्थानीय खतरा बना रह सकता है।
मॉनसून की रफ्तार धीमी होने की वजह क्या है?
मॉनसून की सक्रियता केवल एक कारण से तय नहीं होती। ट्रफ की स्थिति, बंगाल की खाड़ी में बनने वाली मौसम प्रणालियां, अरब सागर से आने वाली नमी, ऊपरी वायुमंडलीय हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ जैसे कई कारक मिलकर बारिश को प्रभावित करते हैं।
IMD के विस्तारित पूर्वानुमान के अनुसार 16 से 22 जुलाई के दौरान मॉनसून ट्रफ का पश्चिमी सिरा कई दिनों तक अपनी सामान्य स्थिति के आसपास रह सकता है। इसी अवधि के शुरुआती हिस्से में उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट के पास कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना भी जताई गई है। इससे पूर्वी और मध्य भारत की बारिश को समर्थन मिल सकता है।
19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत पर एक नया पश्चिमी विक्षोभ प्रभाव डाल सकता है। इसके बाद पश्चिमी हिमालय, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश बढ़ने का अनुमान है।
क्या अल नीनो के कारण कमजोर हुई बारिश?
IMD के जुलाई मासिक पूर्वानुमान के मुताबिक भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में इस समय कमजोर अल नीनो स्थितियां मौजूद हैं और मॉनसून सीजन के दौरान इनके मजबूत होने की संभावना है। हालांकि किसी एक सप्ताह की कमजोर बारिश को केवल अल नीनो से जोड़ना सही नहीं होगा।
अल्प अवधि की बारिश मुख्य रूप से मॉनसून ट्रफ, कम दबाव के क्षेत्रों और क्षेत्रीय वायुमंडलीय प्रणालियों की स्थिति पर निर्भर करती है। IMD ने जुलाई 2026 में देश की औसत मासिक बारिश सामान्य के 94 प्रतिशत से कम रहने की संभावना जताई थी।
उपलब्ध आधिकारिक अनुमान यह नहीं कहता कि अगस्त में अल नीनो कमजोर हो जाएगा। इसके विपरीत, IMD ने मॉनसून सीजन में इसके और मजबूत होने की संभावना जताई है। इसलिए ऐसे दावों को आधिकारिक पुष्टि के बिना प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए।
क्या जुलाई की बारिश की कमी पूरी हो पाएगी?
बारिश की कमी की भरपाई संभव है या नहीं, इसका निश्चित जवाब अभी नहीं दिया जा सकता। कुछ दिनों की तेज बारिश साप्ताहिक या क्षेत्रीय घाटा घटा सकती है, लेकिन पूरे महीने या सीजन की कमी पूरा होना बारिश की अवधि, फैलाव और तीव्रता पर निर्भर करेगा।
16 से 22 जुलाई के विस्तारित पूर्वानुमान में देश की कुल बारिश सामान्य से थोड़ी कम रहने का अनुमान है। केरल, पूर्व-मध्य भारत, पश्चिमी हिमालय और हिमालय की तलहटी में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, जबकि राजस्थान तथा उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम रह सकती है।
इसका अर्थ है कि कुछ राज्यों को अच्छी बारिश मिल सकती है, लेकिन पूरे देश की वर्षा-कमी तुरंत समाप्त होने की संभावना नहीं मानी जा सकती।
किसानों के लिए क्या मायने हैं?
बारिश का लंबा अंतराल खरीफ फसलों के लिए चिंता बढ़ा सकता है, विशेषकर उन खेतों में जहां सिंचाई का वैकल्पिक साधन उपलब्ध नहीं है। किसानों को स्थानीय कृषि मौसम सलाह और जिला स्तर के पूर्वानुमान पर ध्यान देना चाहिए।
- उपलब्ध नमी को बचाने के लिए अनावश्यक सिंचाई से बचें।
- कीटनाशक या खाद का छिड़काव बारिश और तेज हवा का पूर्वानुमान देखकर करें।
- भारी बारिश की चेतावनी वाले क्षेत्रों में खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था रखें।
- काटी हुई फसल और मंडी ले जाने वाली उपज को सुरक्षित एवं ढकी हुई जगह पर रखें।
- बिजली चमकने के दौरान खुले खेत, ऊंचे पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहें।
IMD ने भी सामान्य से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण, उपलब्ध जल के कुशल प्रबंधन और कृषि आकस्मिक योजनाओं की जरूरत पर जोर दिया है।
बारिश के दौरान सावधानियां
भारी बारिश या आंधी-बिजली की संभावना वाले क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। जलभराव वाली सड़क पार करने से बचें और बिजली चमकने पर खुले स्थान में न रुकें।
यात्रा से पहले जिला स्तर का मौसम पूर्वानुमान जरूर जांचें, क्योंकि किसी राज्य के सभी जिलों में बारिश की तीव्रता एक जैसी नहीं होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दिल्ली में बारिश कब बढ़ सकती है?
दिल्ली में 20 जुलाई तक कहीं-कहीं बारिश की संभावना है। 21 जुलाई को वर्षा का दायरा बढ़ सकता है। 15 से 17 जुलाई तक गर्म और उमस भरी परिस्थितियां बनी रह सकती हैं।
क्या 16 जुलाई से पूरे उत्तर भारत में झमाझम बारिश होगी?
नहीं। बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे और क्षेत्रवार बढ़ेंगी। उत्तर-पश्चिम भारत के कई मैदानी इलाकों में व्यापक बारिश 19 से 21 जुलाई के बीच बढ़ने की संभावना है।
क्या पूरे देश में मॉनसून रुक गया है?
नहीं। कुछ क्षेत्रों में बारिश कमजोर है, जबकि पूर्वी, पूर्वोत्तर और तटीय भारत के कई भागों में मॉनसून सक्रिय है।
क्या जुलाई की बारिश सामान्य से कम रह सकती है?
IMD के मासिक पूर्वानुमान में जुलाई 2026 की अखिल भारतीय औसत वर्षा सामान्य के 94 प्रतिशत से कम रहने की संभावना जताई गई है। वास्तविक स्थिति महीने के अंत में उपलब्ध आंकड़ों से स्पष्ट होगी।
क्या अल नीनो अगस्त में कमजोर हो जाएगा?
IMD के उपलब्ध जुलाई पूर्वानुमान में ऐसा नहीं कहा गया है। विभाग ने कमजोर अल नीनो स्थितियों के मॉनसून सीजन में और मजबूत होने की संभावना जताई है।

