हरियाणा के हिसार में स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University – CCS HAU) भारत के प्रमुख कृषि शिक्षण और अनुसंधान संस्थानों में शामिल है। आम तौर पर HAU के नाम से पहचाना जाने वाला यह विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ किसानों तक नई तकनीक, फसल संबंधी जानकारी और मौसम आधारित कृषि सलाह पहुंचाने का काम भी करता है।
विश्वविद्यालय का मुख्य परिसर हिसार में है, जबकि इसके शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार से जुड़े केंद्र हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों में कार्यरत हैं। विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट इसे देश में कृषि अनुसंधान के प्रमुख संस्थानों में गिनती है और हरित तथा श्वेत क्रांति के दौर में भी इसके योगदान का उल्लेख करती है।
हाल के वर्षों में बदलते मौसम, अत्यधिक गर्मी, अनियमित मानसून, शीतलहर, पाला, तेज हवा और भारी वर्षा जैसी परिस्थितियों ने खेती में मौसम संबंधी सूचनाओं का महत्व बढ़ाया है। इसी संदर्भ में CCS HAU का कृषि मौसम विज्ञान विभाग और किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि परामर्श इसकी एक महत्वपूर्ण गतिविधि बन जाते हैं।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई?
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना 2 फरवरी 1970 को तत्कालीन पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के विभाजन के बाद हुई थी। विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसे राष्ट्रपति अध्यादेश के माध्यम से स्थापित किया गया, जिसे बाद में Haryana and Punjab Agricultural Universities Act, 1970 के तहत वैधानिक रूप मिला।
लोकसभा ने संबंधित अधिनियम को 29 मार्च 1970 को पारित किया था।
शुरुआत में इसका नाम हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (Haryana Agricultural University) था। बाद में 31 अक्टूबर 1991 से विश्वविद्यालय का नाम बदलकर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय कर दिया गया।
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विश्वविद्यालय के शुरुआती विकास में इसके प्रथम कुलपति ए. एल. फ्लेचर की भूमिका का उल्लेख भी विश्वविद्यालय के इतिहास में मिलता है।
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हिसार में फैला विशाल कृषि विश्वविद्यालय परिसर
CCS HAU का मुख्य परिसर हिसार में स्थित है। विश्वविद्यालय की आधिकारिक Facts जानकारी के अनुसार हिसार परिसर का क्षेत्रफल लगभग 7,219 एकड़ है, जबकि बाहरी अनुसंधान एवं अन्य केंद्रों के पास लगभग 1,426 एकड़ भूमि है। इस प्रकार विश्वविद्यालय से जुड़ा कुल भूमि क्षेत्र लगभग 8,645 एकड़ बैठता है।
इस भूमि का एक बड़ा हिस्सा केवल शैक्षणिक भवनों के लिए नहीं, बल्कि कृषि अनुसंधान, प्रयोगात्मक खेतों, फसल परीक्षण और नई कृषि तकनीकों के मूल्यांकन के लिए भी उपयोग किया जाता है।
हिसार मुख्य परिसर में शिक्षण एवं अनुसंधान भवनों के अलावा नेहरू पुस्तकालय, खेल सुविधाएं, विश्वविद्यालय अस्पताल, कृषि फार्म और दूसरी संस्थागत सुविधाएं मौजूद हैं। विश्वविद्यालय के राज्य के दूसरे हिस्सों में भी अनुसंधान स्टेशन और कृषि से जुड़े केंद्र कार्यरत हैं।
CCS HAU में कृषि शिक्षा
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय का कार्य केवल खेती से संबंधित शोध तक सीमित नहीं है। यहां कृषि और उससे संबंधित कई विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर और शोध स्तर की शिक्षा दी जाती है।
विश्वविद्यालय की वर्तमान वेबसाइट पर जिन प्रमुख शिक्षण इकाइयों का उल्लेख है उनमें:
- College of Agriculture, Hisar
- College of Agriculture, Kaul
- College of Agriculture, Bawal
- College of Agricultural Engineering and Technology
- College of Basic Sciences & Humanities
- College of Biotechnology
- College of Fisheries Science
- I.C. College of Community Science
शामिल हैं।
कृषि शिक्षा के साथ विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को फसल विज्ञान, कृषि इंजीनियरिंग, जैव प्रौद्योगिकी, मत्स्य विज्ञान, पर्यावरण, मौसम और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों से जोड़ना भी है।
राष्ट्रीय स्तर पर CCS HAU की स्थिति
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की NIRF 2025 Agriculture and Allied Sectors Ranking में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय को देश में 10वां स्थान मिला। NIRF में विश्वविद्यालय का स्कोर 61.47 दर्ज किया गया।
इससे एक वर्ष पहले NIRF 2024 की Agriculture and Allied Sectors ranking में विश्वविद्यालय सातवें स्थान पर था।
विश्वविद्यालय की वेबसाइट इसे ICAR के National Agricultural Education Accreditation Board से A+ Grade accredited संस्थान के रूप में भी प्रस्तुत करती है।
कृषि अनुसंधान में विश्वविद्यालय की भूमिका
CCS HAU की पहचान का बड़ा हिस्सा कृषि अनुसंधान से जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय में विभिन्न फसलों की उत्पादकता, किस्म सुधार, पौध रोग, मृदा एवं जल प्रबंधन, कृषि मौसम विज्ञान, कृषि इंजीनियरिंग, जैव प्रौद्योगिकी और कृषि अर्थशास्त्र जैसे विषयों पर शोध किया जाता है।
हरियाणा की कृषि परिस्थितियां उत्तर भारत के लिए विशेष महत्व रखती हैं क्योंकि यहां गेहूं, धान, कपास, सरसों, बाजरा सहित अनेक प्रमुख फसलों की खेती होती है। विश्वविद्यालय की अनुसंधान प्रणाली इन्हीं स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार वैज्ञानिक समाधान विकसित करने पर केंद्रित रही है।
विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों ने भी फसल सुधार में काम किया है। उदाहरण के लिए CCS HAU के Regional Research Station, Kaul की आधिकारिक जानकारी में HKR श्रृंखला की गैर-सुगंधित धान किस्मों के साथ Taraori Basmati, Haryana Basmati-1 और Haryana Basmati-2 जैसी बासमती किस्मों के विकास का उल्लेख मिलता है।
किसानों तक तकनीक पहुंचाना विश्वविद्यालय की प्रमुख जिम्मेदारी
कृषि विश्वविद्यालय में विकसित कोई तकनीक तभी उपयोगी होती है जब वह खेत तक पहुंचे। इसी उद्देश्य से CCS HAU में Extension Education को शिक्षा और अनुसंधान के साथ विश्वविद्यालय के प्रमुख कार्यों में रखा गया है।
विश्वविद्यालय के अनुसार Directorate of Extension Education की जिम्मेदारी हरियाणा में किसानों, पशुपालकों, ग्रामीण युवाओं और कृषि से जुड़े सरकारी कर्मचारियों तक प्रमाणित कृषि तकनीक एवं जानकारी पहुंचाना है। इसके लिए राज्य के कृषि, बागवानी और पशुपालन विभागों सहित विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय किया जाता है।
इसी व्यवस्था का हिस्सा विभिन्न जिलों में संचालित कृषि विज्ञान केंद्र भी हैं, जहां किसानों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन और नई कृषि तकनीकों की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।
CCS HAU का कृषि मौसम विज्ञान विभाग क्यों महत्वपूर्ण है?
खेती पर मौसम का सीधा प्रभाव पड़ता है। बारिश कब होगी, तापमान कितना रहेगा, हवा कितनी तेज चलेगी, पाला पड़ने का खतरा है या नहीं और आने वाले दिनों में मौसम किस दिशा में बदल सकता है—इन जानकारियों के आधार पर किसान सिंचाई, बुवाई, कटाई, खाद तथा कीटनाशक छिड़काव जैसे निर्णय बदल सकता है।
इसी जरूरत को देखते हुए CCS HAU में Department of Agricultural Meteorology कृषि और मौसम के संबंधों पर शिक्षा, अनुसंधान और किसानों के लिए कृषि-मौसम सलाह से जुड़ा कार्य करता है।
विभाग के पाठ्यक्रम में केवल सामान्य मौसम विज्ञान ही नहीं बल्कि Crop Weather Interactions, Agricultural Climatology, Weather Forecasting, Climate Change and Sustainable Development, Remote Sensing, GIS, Air Pollution Meteorology और Weather Risk Management जैसे विषय भी शामिल हैं।
इससे कृषि मौसम विज्ञान का उपयोग केवल अगले दिन की बारिश जानने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह फसल उत्पादन, जोखिम प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन से भी जुड़ जाता है।
कृषि मौसम विज्ञान विभाग को मिले राष्ट्रीय पुरस्कार
CCS HAU के कृषि मौसम विज्ञान विभाग का मौसम आधारित कृषि सूचना प्रसार का लंबा रिकॉर्ड है।
विश्वविद्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार All India Coordinated Research Project on Agrometeorology के तहत CCS HAU के Agricultural Meteorology विभाग को CRIDA-ICAR की ओर से 2008-09 और 2009-10 में लगातार दो वर्षों तक Best Centre Award मिला।
इसी परियोजना को 2006, 2007 और 2008 के दौरान फसल की स्थिति से जुड़ी नियमित और महत्वपूर्ण जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए Best Information Dissemination Award भी मिला।
इसके बाद 20 नवंबर 2013 को भारत मौसम विज्ञान विभाग, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से किसानों तक कृषि-मौसम परामर्श पहुंचाने के कार्य के लिए विभाग को National Award of Excellence दिया गया।
ये उपलब्धियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि विश्वविद्यालय में मौसम विज्ञान का उपयोग केवल अकादमिक अनुसंधान के रूप में नहीं, बल्कि खेत स्तर पर कृषि निर्णयों में भी किया जाता रहा है।
e-Mausam और किसानों तक मौसम आधारित जानकारी
CCS HAU की आधिकारिक वेबसाइट किसानों के लिए e-Mausam सेवा का लिंक उपलब्ध कराती है।
इससे कृषि मौसम संबंधी जानकारी को डिजिटल माध्यम से किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
eMausam HAU के मोबाइल एप्लिकेशन का विवरण भी इसे हरियाणा के किसानों के लिए CCS HAU की crop-weather information service बताता है। इसमें जिला स्तर के मौसम पूर्वानुमान, वर्तमान मौसम, मौसम आधारित फसल सलाह तथा विश्वविद्यालय द्वारा सुझाई गई crop package and practices जैसी जानकारी उपलब्ध कराने का उल्लेख है। एप विवरण में इस व्यवस्था को कृषि मौसम वैज्ञानिकों और IMD सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के सहयोग से विकसित सेवा बताया गया है।
खेती में ऐसी सेवाओं का व्यावहारिक महत्व इसलिए है क्योंकि मौसम की सूचना को सीधे कृषि कार्य से जोड़ने पर किसान केवल “बारिश होगी या नहीं” नहीं जानता, बल्कि यह भी तय कर सकता है कि बारिश से पहले या बाद में कौन-सा कृषि कार्य किया जाए।
डॉ. मदन लाल खीचड़ और मौसम संबंधी सूचनाओं का प्रसार
CCS HAU से कृषि मौसम और हरियाणा के मौसम संबंधी जानकारी के सार्वजनिक प्रसार में डॉ. मदन लाल खीचड़ का नाम लंबे समय से जुड़ा रहा है।
विश्वविद्यालय और सार्वजनिक समाचार स्रोतों में डॉ. खीचड़ को कृषि मौसम विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ के रूप में उद्धृत किया जाता रहा है। वर्ष 2026 की सार्वजनिक जानकारी में वह विश्वविद्यालय के Director of Students’ Welfare के रूप में भी कार्यरत बताए गए हैं।
मौसम में बदलाव के दौरान पश्चिमी विक्षोभ, मानसून गतिविधि, तापमान में बदलाव, बारिश की संभावना और किसानों पर इसके संभावित प्रभाव को समझाने वाले उनके मौसम अपडेट विभिन्न मीडिया संस्थानों तक पहुंचते रहे हैं।
Mausam Breaking को भी डॉ. मदन लाल खीचड़ की ओर से हरियाणा के मौसम से संबंधित प्रेस नोट नियमित रूप से प्राप्त होते हैं। इन प्रेस नोटों में उपलब्ध पूर्वानुमान और कृषि-मौसम जानकारी को तारीख तथा स्रोत के उल्लेख के साथ समाचार के रूप में प्रकाशित किया जाता है।
इस तरह विश्वविद्यालय से निकलने वाली वैज्ञानिक मौसम जानकारी आम किसानों और स्थानीय पाठकों तक समाचार माध्यमों के जरिए भी पहुंचती है।
खेती के लिए सामान्य मौसम पूर्वानुमान और कृषि-मौसम सलाह में अंतर
सामान्य मौसम पूर्वानुमान यह बता सकता है कि किसी क्षेत्र में बारिश, तापमान, हवा या आंधी की क्या संभावना है।
कृषि-मौसम परामर्श इससे एक कदम आगे जाता है।
उदाहरण के तौर पर यदि बारिश होने की संभावना है तो कृषि-मौसम सलाह में यह महत्वपूर्ण हो सकता है कि किसान फिलहाल सिंचाई रोके, कीटनाशक का छिड़काव स्थगित करे या कटाई की गई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखे।
इसी प्रकार अधिक तापमान, शीतलहर या पाले की स्थिति में अलग-अलग फसलों के लिए अलग कृषि प्रबंधन की जरूरत हो सकती है।
यही कारण है कि कृषि मौसम विज्ञान खेती में मौसम पूर्वानुमान और वास्तविक कृषि निर्णय के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में CCS HAU की भूमिका
हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में मौसम में बदलाव का सीधा असर फसलों पर पड़ सकता है। तापमान में असामान्य बढ़ोतरी, बारिश के वितरण में बदलाव, लंबे शुष्क दौर और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाएं खेती के पारंपरिक कैलेंडर को प्रभावित कर सकती हैं।
CCS HAU के Agricultural Meteorology पाठ्यक्रम में Climate Change and Sustainable Development, weather forecasting, crop-weather interaction तथा risk-management जैसे विषयों का शामिल होना बताता है कि विश्वविद्यालय इस क्षेत्र को केवल दैनिक मौसम पूर्वानुमान के नजरिए से नहीं देखता।
भविष्य में climate-smart agriculture में फसल की सही किस्म, सही बुवाई समय, पानी का बेहतर उपयोग और समय पर कृषि-मौसम चेतावनी अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
शोध से खेत तक का मॉडल
CCS HAU की कृषि प्रणाली को मोटे तौर पर तीन आपस में जुड़े हिस्सों में समझा जा सकता है—शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार।
विश्वविद्यालय में विद्यार्थी और शोधकर्ता कृषि विज्ञान का अध्ययन करते हैं। वैज्ञानिक प्रयोगों और फील्ड ट्रायल से नई जानकारी तथा तकनीक विकसित होती है। इसके बाद Extension Education, कृषि विज्ञान केंद्र, किसान प्रशिक्षण और डिजिटल माध्यमों के जरिए उपयोगी जानकारी किसानों तक पहुंचाई जाती है।
कृषि मौसम विज्ञान भी इसी ढांचे का हिस्सा है। मौसम के आंकड़ों और पूर्वानुमान को फसल की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर ऐसी सलाह तैयार की जा सकती है जिसे किसान अपने खेत में लागू कर सके।
हरियाणा के किसानों के लिए CCS HAU का महत्व
हरियाणा में खेती आज केवल बीज, खाद और सिंचाई तक सीमित विषय नहीं है। किसान को बाजार, मौसम, फसल रोग, नई किस्म, पानी, मशीनरी और उत्पादन लागत जैसे कई पहलुओं पर एक साथ निर्णय लेने पड़ते हैं।
ऐसे में कृषि विश्वविद्यालय की उपयोगिता उस समय अधिक बढ़ जाती है जब शोध और वैज्ञानिक जानकारी प्रयोगशालाओं से निकलकर किसान तक सरल रूप में पहुंचे।
CCS HAU की कृषि अनुसंधान व्यवस्था, विस्तार शिक्षा, कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि मौसम सेवाएं इसी व्यापक प्रणाली के अलग-अलग हिस्से हैं।
निष्कर्ष
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की स्थापना 1970 में हुई और पांच दशक से अधिक समय में यह हरियाणा की कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसान विस्तार व्यवस्था का एक प्रमुख संस्थान बना है।
विश्वविद्यालय का महत्व केवल इसके विशाल हिसार परिसर या शैक्षणिक कार्यक्रमों में नहीं है। इसकी वास्तविक भूमिका खेतों तक पहुंचने वाली कृषि तकनीक, फसल अनुसंधान और मौसम आधारित कृषि सलाह में भी दिखाई देती है।
कृषि मौसम विज्ञान विभाग का काम इस भूमिका का विशेष उदाहरण है। मौसम और खेती के बीच संबंधों पर अनुसंधान, कृषि-मौसम शिक्षा, e-Mausam जैसी डिजिटल व्यवस्था और किसानों के लिए मौसम आधारित परामर्श बदलती जलवायु में और अधिक महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं।
इसी कारण CCS HAU को समझने के लिए केवल एक कृषि विश्वविद्यालय के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है। यह हरियाणा में कृषि शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान, मौसम सूचना और किसान तक तकनीक पहुंचाने वाली एक विस्तृत संस्थागत व्यवस्था का हिस्सा है।
इस लेख में विश्वविद्यालय के इतिहास और परिसर संबंधी तथ्यों के लिए CCS HAU की आधिकारिक History एवं Facts जानकारी, कृषि मौसम विज्ञान संबंधी तथ्यों के लिए विश्वविद्यालय के Department of Agricultural Meteorology के पाठ्यक्रम और Awards & Honors रिकॉर्ड तथा राष्ट्रीय रैंकिंग के लिए भारत सरकार की NIRF 2025 जानकारी का उपयोग किया गया है।









