नई दिल्ली: देशभर में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलता नजर आ रहा है। कुछ दिनों की सुस्ती के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दोबारा सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के प्रभाव से उत्तर भारत, पूर्वोत्तर भारत और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां तेज हो रही हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह प्रणाली और मजबूत हो सकती है, जिससे कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश देखने को मिल सकती है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए अगले सात दिनों तक बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
बंगाल की खाड़ी का लो प्रेशर बना बारिश की बड़ी वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ कम दबाव का क्षेत्र फिलहाल मानसून को नई ऊर्जा दे रहा है। इस प्रणाली के कारण वातावरण में नमी की मात्रा बढ़ रही है और मानसूनी हवाएं उत्तर एवं मध्य भारत की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। यही वजह है कि कई राज्यों में बादलों की सक्रियता बढ़ गई है और रुक-रुककर वर्षा का दौर शुरू हो चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मौसम तंत्र अगले कुछ दिनों तक सक्रिय बना रहता है तो बारिश का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं। इससे उन क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है जहां जुलाई के दौरान सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई थी।
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उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले सात दिन बारिश का दौर
मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश और बिहार में अगले एक सप्ताह तक मानसून सक्रिय रहेगा। इस दौरान कई जिलों में लगातार बारिश होने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी दर्ज की जा सकती है।
बारिश के साथ गरज-चमक, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में लोगों को खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव, सड़क यातायात प्रभावित होने और छोटे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं।
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20 से 30 जुलाई के बीच मध्य भारत में बढ़ सकती है बारिश
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 20 से 30 जुलाई के बीच मध्य भारत में मानसून की गतिविधियां और मजबूत हो सकती हैं। इसकी प्रमुख वजह बंगाल की खाड़ी में सक्रिय लो प्रेशर सिस्टम के साथ भूमध्य रेखा के आसपास विकसित हो रही एक नई मौसमी प्रणाली को माना जा रहा है।
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यदि दोनों मौसम तंत्र अनुकूल बने रहते हैं तो मध्य प्रदेश सहित मध्य भारत के कई हिस्सों में वर्षा का दायरा बढ़ सकता है। इससे उन क्षेत्रों को भी राहत मिलने की संभावना है जहां अब तक मानसून अपेक्षाकृत कमजोर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में भी बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है और कई जिलों में अच्छी वर्षा दर्ज हो सकती है।
पहाड़ी राज्यों में बढ़ा खतरा, जम्मू-कश्मीर में लगातार बादल फटने की घटनाएं
जहां मैदानी राज्यों में बारिश राहत लेकर आ रही है, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में यही बारिश चिंता का कारण बन रही है। जम्मू-कश्मीर में मानसून के आगमन के बाद मौसम लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पिछले लगभग दो सप्ताह के दौरान राज्य में कई स्थानों पर बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
मौसम विभाग का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले दिनों में भी तेज बारिश की संभावना बनी हुई है। लगातार वर्षा के कारण भूस्खलन, अचानक बाढ़ और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने का खतरा बना रह सकता है।
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों और पर्यटकों से मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने तथा अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।
उत्तर-पूर्व भारत में भी सक्रिय रहेगा मानसून
बंगाल की खाड़ी से मिल रही लगातार नमी का असर उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों में भी दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर तेज बारिश के कारण स्थानीय स्तर पर जलभराव और भूस्खलन जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।
मौसम विभाग ने स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और लोगों को मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी है।
दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर बरकरार
देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय होने के बावजूद दक्षिण भारत के कुछ क्षेत्रों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है। तमिलनाडु के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में गर्म और उमस भरे मौसम को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय और कमजोर मानसून की स्थिति के कारण देशभर में मौसम का स्वरूप एक समान नहीं है। जहां कई राज्यों में अच्छी बारिश हो रही है, वहीं कुछ क्षेत्रों में अब भी वर्षा की कमी महसूस की जा रही है।
किसानों के लिए राहत भरी खबर
मानसून की दोबारा सक्रियता कृषि क्षेत्र के लिए राहत भरी मानी जा रही है। कई राज्यों में बारिश की कमी के कारण खरीफ फसलों की बुवाई और प्रारंभिक वृद्धि प्रभावित हो रही थी। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी वर्षा जारी रहती है तो धान, मक्का, सोयाबीन, दलहन और अन्य खरीफ फसलों को पर्याप्त नमी मिल सकेगी।
बारिश बढ़ने से जलाशयों में जलस्तर सुधरने, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई व्यवस्था को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञ किसानों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार खेती संबंधी निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं।
भारी बारिश के दौरान रखें ये सावधानियां
मौसम विभाग ने लोगों को बदलते मौसम के बीच सतर्क रहने की अपील की है। विशेष रूप से जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है वहां आवश्यक सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
- आकाशीय बिजली के दौरान खुले मैदानों में जाने से बचें।
- पेड़ों और बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों।
- तेज बहाव वाले नदी-नालों को पार करने का प्रयास न करें।
- पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले मौसम की ताजा जानकारी अवश्य लें।
- जलभराव वाले रास्तों पर वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
- प्रशासन और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
आने वाले दिनों में कैसा रहेगा देश का मौसम?
मौसम विभाग के अनुसार आने वाले सप्ताह में देश के बड़े हिस्से में मानसून सक्रिय बना रह सकता है। उत्तर प्रदेश, बिहार, पूर्वोत्तर भारत और मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां तेज रहने का अनुमान है। वहीं 20 से 30 जुलाई के बीच मध्य भारत में वर्षा का दायरा और बढ़ सकता है। दूसरी ओर दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में गर्म और उमस भरा मौसम जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर आने वाले दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून एक बार फिर मजबूत होता दिखाई दे रहा है। जहां बारिश से गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की आवश्यकता होगी।









